International yoga day was celebrated in Kendriya Vidyalaya No 2 Jaipur on 21 June 2022 at 7.00 A.M in the Vidyalaya premises. All students, Teacher's and staff of the Vidyalaya was participated in this events.
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Tuesday, June 21, 2022
Monday, June 20, 2022
International Yoga Day 2022 (21 June 2022)
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2022)
वर्ष 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को यह प्रस्ताव पसंद आया और 21 जून 2015 को पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। श्री मोदी द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव और यू.एन. द्वारा किए गए निर्णय की दुनिया भर के आध्यात्मिक नेताओं और योग के चिकित्सकों द्वारा इसकी सराहना की गई। भारतीय आध्यात्मिक नेता और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री रवि शंकर ने कहा कि योग पहले एक अनाथ बच्चे जैसा था लेकिन अब ऐसा नहीं है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे मान्यता देने के बाद इस कला को वह कद प्राप्त हुआ है जिसका यह सही मायनों में हकदार थी।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2022 का थीम है "Yoga for Humanity".
“योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकता, विचार और कार्रवाई, संयम और पूर्ति; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने का सरल माध्यम है। इसकी मदद से न सिर्फ स्वास्थ्य तन बल्कि शांत मन को भी पाया जा सकता है ।योग की मदद से पूरी दुनिया में शांति और व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।”
योग का इतिहास
ऐसा माना जाता है कि जब से सभ्यता शुरू हुई है तभी से योग किया जा रहा है। योग के विज्ञान की उत्पत्ति हजारों साल पहले हुई थी, पहले धर्मों या आस्था के जन्म लेने से काफी पहले हुई थी। योग विद्या में शिव को पहले योगी या आदि योगी तथा पहले गुरू या आदि गुरू के रूप में माना जाता है।
कई हजार वर्ष पहले, हिमालय में कांति सरोवर झील के तटों पर आदि योगी ने अपने प्रबुद्ध ज्ञान को अपने प्रसिद्ध सप्तऋषि को प्रदान किया था। सत्पऋषियों ने योग के इस ताकतवर विज्ञान को एशिया, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका एवं दक्षिण अमरीका सहित विश्व के भिन्न - भिन्न भागों में पहुंचाया। रोचक बात यह है कि आधुनिक विद्वानों ने पूरी दुनिया में प्राचीन संस्कृतियों के बीच पाए गए घनिष्ठ समानांतर को नोट किया है। तथापि, भारत में ही योग ने अपनी सबसे पूर्ण अभिव्यक्ति प्राप्त की। अगस्त नामक सप्तऋषि, जिन्होंने पूरे भारतीय उप महाद्वीप का दौरा किया, यौगिक तरीके से जीवन जीने के इर्द-गिर्द इस संस्कृति को गढ़ा।
योग करते हुए पित्रों के साथ सिंधु - सरस्वती घाटी सभ्यता के अनेक जीवाश्म अवशेष एवं मुहरें भारत में योग की मौजूदगी का सुझाव देती हैं। देवी मां की मूर्तियों की मुहरें, लैंगिक प्रतीक तंत्र योग का सुझाव देते हैं। लोक परंपराओं, सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक एवं उपनिषद की विरासत, बौद्ध एवं जैन परंपराओं, दर्शनों, महाभारत एवं रामायण नामक महाकाव्यों, शैवों, वैष्णवों की आस्तिक परंपराओं एवं तांत्रिक परंपराओं में योग की मौजूदगी है।
21 जून को इस दिन के रूप क्यों चुना गया
दिल्ली की एक छात्रा के एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं कि 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए क्यों चुना गया। उन्होंने कहा, “आज मैं पहली बार इसका खुलासा करता हूं। सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। यह दिन हमारे भूभाग में सबसे बड़ा दिन होता है। हमें उस दिन सबसे ज्यादा ऊर्जा मिलती है। यही कारण है कि उस दिन का सुझाव दिया गया था।”
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का “लोगो” (Logo) क्या दर्शाता है ?
1. यह मानवता के लिए शांति और सद्भाव को दर्शाता है।
2. 'लोगो' में दोनों हाथों का जोड़ना सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का मिलन दर्शाता है।
3. 'लोगो' मन और शरीर, मनुष्य और प्रकृति और स्वास्थ्य और भलाई के लिए समग्र दृष्टिकोण के बीच एक सही सामंजस्य को दर्शाता है।
4. हरे पत्ते प्रकृति और नीले रंग अग्नि तत्व का प्रतीक है। भूरे रंग के पत्तों पृथ्वी का प्रतीक है।
5. लोगो' में सूर्य का होना ऊर्जा और प्रेरणा के स्रोत का प्रतीक है।
Friday, June 17, 2022
Saturday, April 23, 2022
World Book And Copyright Day 2022 (23 APRIL 2022)
वर्ल्ड बुक और कॉपीराइट डे
वर्ल्ड बुक और कॉपीराइट डे को इंटरनेशनल डे ऑफ बुक के रूप में भी जाना जाता है। इसे 23 अप्रैल को मनाया जाता है। बुक डे को किताबें पढ़ने, लिखने, ट्रांसलेट, पब्लिशिंग और कॉपीराइट के महत्व को दर्शाने के लिए इस दिन को खास तौर पर मनाया जाता है। इस वार्षिक इवेंट को यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (UNESCO) द्वारा आयोजित किया जाता है।
वर्ल्ड बुक एंड कॉपीराइट डे को मनाने के पीछे उद्देश्य है किताब पढ़ने की खुशी को लोगों तक पहुंचाना। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही इस वर्ष का थीम चुना गया है। वर्ल्ड बुक एंड कॉपीराइट डे 2022 का थीम है 'Read, so you never feel low'।
वर्ल्ड बुक एंड कॉपीराइट डे हर साल यूनेस्को द्वारा आयोजित किया जाता है। यह पहली बार 23 अप्रैल 1995 में मनाया गया था। यूनेस्को (UNESCO) ने विलियम शेक्सपीयर और मिगुएल सर्वेंटिस जैसे साहित्यकारों को रिस्पेक्ट देने के लिए 23 अप्रैल की तारीख को चुना था लेकिन वास्तव में इस दिन को पहली बार 1922 में स्पेनिश राइटर विसेंट क्लेव एंड्रेस ने मिगुएल सर्वेंटिस को याद करने और उन्हें सम्मान देने के मकसद से इस्तेमाल किया था। 23 अप्रैल 1995 में पेरिस में आयोजित यूनेस्को के जनरल कॉन्फ्रेंस के लिए एक नेचुरल च्वाइस थी। इस दिन पुस्तकों और लेखकों को विश्वव्यापी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए और सभी को पुस्तकों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रण लिया जाता है।
इस दिन, यूनेस्को और पुस्तक उद्योग के तीन प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन - प्रकाशन, पुस्तक विक्रेता और पुस्तकालय प्रत्येक वर्ष 23 अप्रैल से शुरू होकर एक वर्ष की अवधि के लिए विश्व पुस्तक राजधानी का चयन करते हैं। मैक्सिकन शहर ग्वाडलाजारा को 2022 के लिए विश्व पुस्तक राजधानी के रूप में चुना गया है। पूरे वर्ष कई कार्यक्रम होंगे जो सामाजिक परिवर्तन को गति देने, हिंसा का मुकाबला करने और शांति की संस्कृति के निर्माण में पुस्तकों और पढ़ने की भूमिका पर केंद्रित होंगे।
Tuesday, April 19, 2022
WORLD EARTH DAY 2022 (22 April 2022)
विश्व पृथ्वी दिवस 2022
विश्व पृथ्वी दिवस 2022 पूरे विश्व के लोगों द्वारा 22 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जायेगा। पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय को दर्शाने के लिये साथ ही पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिये 22 अप्रैल को पूरे विश्व भर के लोगों के द्वारा एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में हर साल विश्व पृथ्वी पृथ्वी दिवस को मनाया जाता है। पहली बार, इसे 1970 में मनाया गया और उसके बाद से लगभग 192 देशों के द्वारा वैश्विक आधार पर सालाना इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई।
विश्व पृथ्वी दिवस को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने की शुरुआत इसके मुद्दे को सुलझाने के द्वारा पर्यावरणीय सुरक्षा का बेहतर ध्यान देने के लिये, राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करने के लिये के लिये की गयी। 1969 में, सैन फ्रांसिस्को के जॉन मैककोनल नाम के एक शांति कार्यकर्ता जो सक्रियता से इस कार्यक्रम को शुरु करवाने में शामिल थे, ने एक साथ मिलकर पर्यावरणीय सुरक्षा के लिये इस दिन को मनाने का प्रस्ताव रखा। 21 मार्च 1970 को वसंत विषुव में मनाने के लिये इस कार्यक्रम को जॉन मैककोनेल ने चुना था जबकि 22 अप्रैल 1970 को इस कार्यक्रम को मनाने के लिये अमेरिका के विंसकॉन्सिन सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने चुना था।
बेहतर भविष्य के लिये अपने पर्यावरणीय मसले को सुलझाने के लिये इन्होंने लोगों को इस कार्यक्रम में एक-साथ होकर जुड़ने के लिये संपर्क किया था। विश्व पृथ्वी दिवस के पहले समारोह के दौरान लाखों लोगों ने इसमें अपनी इच्छा जताई और इस कार्यक्रम का लक्ष्य समझने के लिये भाग लिया। विश्व पृथ्वी दिवस के लिये कोई एक तारीख निर्धारित करने के बजाय, इसको दोनों दिन मनाने की शुरुआत हुयी। आमतौर पर, पूरे विश्वभर में जरुरी क्षेत्रों में नये पौधे को लगाने के आम कार्य के साथ पृथ्वी दिवस कार्यक्रम को मनाने की शुरुआत हुयी।
22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस उत्सव की तारीख की स्थापना करने के अच्छे कार्य में भागीदारी के लिये अमेरिका के विस्कॉन्सिन सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन को स्वतंत्रता पुरस्कार के राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित किया गया। बाद में लगभग 141 राष्ट्रों के बीच वर्ष 1990 में डेनिस हेज़ (वास्तविक राष्ट्रीय संयोजक) के द्वारा वैश्विक तौर पर पृथ्वी दिवस के रुप में 22 अप्रैल को केन्द्रित किया था। बहुत सारे पर्यावरणी मुद्दे पर ध्यान केन्द्रित करने के लिये पृथ्वी सप्ताह के नाम से पूरे सप्ताह भर के लिये ज्यादातर पृथ्वी दिवस समुदाय ने इसे मनाया। इस तरीके से 22 अप्रैल 1970 को आधुनिक पर्यावरणीय आंदोलन के वर्षगाँठ के रुप में चिन्हित किया गया।
लोगों के समक्ष पर्यावरणीय मुद्दे को रखने के साथ ही युद्ध-विरोधी आंदोलन को नियंत्रित करना, दूसरे जीव-जन्तु, स्व-बोध के लिये लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये पृथ्वी दिवस 1970 की स्थापना की गयी थी। 1969 में कैलिफोर्निया के सेंट बारबरा में संस्थापक गेलॉर्ड नेल्सन (विस्कॉन्सिन से एक यू.एस सीनेटर) के द्वारा पृथ्वी दिवस उत्सव के कार्यक्रम के स्थापना के पीछे एक बड़ी त्रासदी, भारी तेल गिराव की त्रासदी थी। इस त्रासदी ने हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषण के लिए जन चेतना बढ़ाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के उपायों को लागू करने की दिशा में गेलॉर्ड नेल्सन को नेतृत्व करने की प्रेरणा दी।
पृथ्वी दिवस के रुप में क्यों 22 अप्रैल को ही मनाया जाता है?
हमारी पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ आज भी जीवन संभव है। धरती पर जीवन को बचाये रखने के लिये पृथ्वी की प्राकृतिक संपत्ति को बनाये रखना बहुत जरुरी है। इस भीड़ में, भगवान द्वारा बनायी गयी सबसे बुद्धिमान कृति इंसान हैं, अपनी मानवता और अपने ग्रह का ध्यान रखना भूल गया है। धरती जिसने इसको जीवन दिया, आज वो उसी धरती के संसाधनों का निर्दयतापूर्वक इस्तेमाल कर रहा है। अपने ग्रह के महत्व के बारे में मानव जाति को जागरुक करने के लिय पृथ्वी दिवस के रुप में 22 अप्रैल को चिन्हित किया गया है।
धरती पर लोगों के रहन-सहन के लापरवाह नजरिये के साथ ही औद्योगिकीकरण की दिनों-दिन बढती दर के बारे में लोगों को जागरुक बनाने के लिये विस्कॉन्सिन से यूएसए सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने इस दिन की नींव रखी। उनके द्वारा यह कदम अपने ग्रह की संपत्ति का सम्मान, प्रोत्साहन करने के साथ ही लोगों के बीच प्राकृतिक संतुलन के विचार को बढ़ाने के लिये लिया गया। हमेशा स्वस्थ और जीवित रहने के लिये पर्यावरणीय मसलों का ध्यान रखना बहुत जरुरी है क्योंकि क्रूर लोग निर्दयतापूर्वक इसके संसाधनो का प्रयोग कर रहें हैं और शताब्दियों से इसके जीवन समर्थक संसाधनों को जर्जर कर रहें हैं।
इसका एक सबसे बड़ा उदाहरण ओजोन परत में क्षरण है जो हमें सूर्य की घातक किरणों से बचाता है। उद्योगों से निकलने वाले जहरीले पदार्थों को मिलने से नदियों का सूखना, पर्यावरण दूषित होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है जो भूमणडलीय तापक्रम में वृद्धि की ओर ले जा रहा है। रोजाना बढ़ते औद्योगिकीकरण वनों की कटाई की ओर ले जा रहें हैं जो अंतत: धरती के तापमान को बढ़ाने का कारण बनेगा।
जो धरती पर स्वाश्वत जीवन के लिये खतरा है जिसको कुछ छोटे उपायों को अपनाकर कम किया जा सकता है, जैसे पेड़-पौधे लगाना, वनों की कटाई को रोकना, वायु प्रदूषण को रोकने के लिये वाहनों के इस्तेमाल को कम करना, बिजली के गैर-जरुरी इस्तेमाल को घटाने के द्वारा ऊर्जा संरक्षण को बढ़ाना। यही छोटे कदम बड़े कदम बन सकते हैं अगर इसे पूरे विश्वभर के द्वारा एक साथ अनुसरण किया जाये।
आज के दिनों में, सब कुछ या तो प्लास्टिक के थैलों में पैक होता है या दुकानदार के द्वारा इसमें दिया जाता है। प्लास्टिक थैलों का उत्पादन दिनों-दिन बढ़ता चला जा रहा है जो कि हमारे लिये एक बहुत ही शर्मनाक स्थिति है क्योंकि इन वस्तुओं का निष्पादन नहीं किया जा सकता है। एक बड़ी चिंता के रुप में पर्यावरण आंदोलन को चिन्हित करने के लिये 22 अप्रैल 1970 को यूएस में पृथ्वी दिवस का पहला उत्सव मनाया गया।
अमेरिका के कॉलेज परिसरों से छात्र समूह जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए तथा पर्यावरण ह्रास का विरोध करने के लिए भाग लिया था। दूसरे समूह ने तेल गिरावट, जहरीले सामानों का निष्पादन, औद्योगिकीकरण के कारण वायु और जल प्रदूषण, कच्चा मैला, कीटनाशकों के इस्तेमाल और उत्पादन इत्यादि के लिये भी विरोध किया था। तब से 22 अप्रैल को आधिकारिक रुप से पृथ्वी दिवस के रुप में मनाना जारी है।
Monday, April 4, 2022
World Health Day 2022 (07 April 2022)
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2022
बता दें कि इस साल स्वास्थ्य दिवस का थीम है हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य (Our Planet, Our Health) तथा 2021 की थीम निष्पक्ष, स्वस्थ दुनिया का निर्माण (Building a fairer, healthier world)। वहीं साल 2020 की थीम की बात करे तो डब्लूएचओ ने कोविड 19 की जंग के खिलाफ दुनिया को स्वस्थ रखने के लिए उन नर्सों और मिडवाइव्स के योगदान को सम्मान के रूप में रखा गया था। इसके लिए आखिरी साल सपोर्ट नर्सेज एंड मिडवाइव्स थीम रखी गई।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी शुरुआत 7 अप्रैल 1948 को की थी। इतना ही नहीं इस दिन WHO की पहली सभी भी हुई थी। वहीं 1950 से हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाने लगा। इस साल जो स्वास्थ्य दिवस पड़ रहा है वो 71वां हेल्थ डे है। हर साल एक खास थीम का चुनाव होता है। साल 1995 की थीम की बात करें तो वह है- वैश्विक पोलियो उन्मूलन तब से अब तक इस घातक बीमारी से ज्यादातर देश मुक्त हो सके।
7 अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे मनाने का कारण
विश्व स्वास्थ्य दिवस को वैश्विक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण चीजों के बारे में लोगों को अवगत कराना है। दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य को समर्पित इस दिन की लोग एक-दूसरे को शुभकामना संदेशों के जरिए बधाई भी देते हैं।
अच्छे स्वास्थ्य के बिना,
संसार के सब सुख व्यर्थ हैं।
विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुभकामनाएं
सबसे पहले रखो अपने शरीर का ध्यान,
फिर करो और सारे काम...
विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुभकामनाएं
योग और व्यायाम अपनाओ,
खुद को स्वस्थ-निरोगी बनाओ.
विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुभकामनाएं
Saturday, March 26, 2022
BOOK DONATION DRIVE IN KV NO 2 JAIPUR (26 MARCH 2022)
पुस्तकोउपहार कार्यक्रम
केंद्रीय विधालय क्रमांक 2, आर्मी एरिया, झोटवाडा, जयपुर मे आज दिनांक 26 मार्च 2022 को रिजल्ट के दिन पुस्तकोउपहार का आयोजन किया जिसमे बहुत सारे विधार्थीयो ने पुस्तके उपहार के रुप मे प्रदान की तथा बहुत सारे विधार्थीयो ने पुस्तके उपहार के रुप मे ग्रहण की, इस कार्यक्रम मे प्राचार्य श्री बाबू सिह राठौड़, श्री एम. बी. अग्रवाल, डॉ. एस. के. सिंघल, श्री सतीश चन्द शर्मा, श्री महेंद्र कुमार भूकर, श्री ओमकार मल, अभिभावकगण तथा अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे ।
Tuesday, March 22, 2022
WORLD WATER DAY (22 MARCH 2022)
विश्व जल दिवस 2022
हर वर्ष के तरह इस वर्ष भी 22 मार्च के दिन विश्व जल दिवस पर देश भर में तमाम तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। वर्ष 1933 से विश्व भर में मनाये जा रहे इस दिन को आज के समय में भी काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। देश भर में विश्व जल दिवस को लेकर अभी से तैयारियां शुरु कर दी गयी है।
The World Water Day theme 2022 is
"GROUNDWATER – MAKING THE INVISIBLE VISIBLE."
इसी के तहत राजस्थान के जैसलमेर में दिनदयाल शोध संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के तत्वाधान में जल संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ भुवनेश जैन द्वारा जल संस्कृति पर आधारित प्राचीन तकनीकों पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में जल संरक्षण के अच्छे प्रभावों पर भी चर्चा की गयी की क्यों यह आवश्यक है और इनका महत्व क्या है।
इसी तरह विश्व जल दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में भी विश्व जल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रकृति के दोहन को रोकने और जल संरक्षण का संकल्प लेते हुए गायत्री महाकुंड में यज्ञ किया। ग्रामीणों ने इस बात पर सहमति जताई कि वृक्ष तथा पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के प्रति हमारे मन में श्रद्धा होनी चाहिए।
पूरे विश्व के लोगों द्वारा हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा इस दिन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने का निर्णय किया गया। लोगों के बीच जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाने के लिये इस अभियान की घोषणा की गयी थी।
इसे पहली बार वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में “पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन” की अनुसूची 21 में आधिकारिक रुप से जोड़ा गया था और पूरे दिन के लिये अपने नल के गलत उपयोग को रोकने के द्वारा जल संरक्षण में उनकी सहायता प्राप्त करने के साथ ही प्रोत्साहित करने के लिये वर्ष 1993 से इस उत्सव को मनाना शुरु किया।
विश्व जल दिवस क्यों मनाया जाता है
यह अभियान यूएन अनुशंसा को लागू करने के साथ ही वैश्विक जल संरक्षण के वास्तविक क्रियाकलापों को प्रोत्साहन देने के लिये सदस्य राष्ट्र सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता हैं। इस अभियान को प्रति वर्ष यूएन एजेंसी की एक इकाई के द्वारा विशेष तौर से बढ़ावा दिया जाता है जिसमें लोगों को जल मुद्दों के बारे में सुनने व समझाने के लिये प्रोत्साहित करने के साथ ही विश्व जल दिवस के लिये अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का समायोजन शामिल है। इस कार्यक्रम की शुरुआत से ही विश्व जल दिवस पर वैश्विक संदेश फैलाने के लिये थीम (विषय) का चुनाव करने के साथ ही विश्व जल दिवस को मनाने के लिये यूएन जल उत्तरदायी होता है।
यूएन सदस्य राज्य और एजेंसी सहित, जल के सभी जटिल मुद्दों के पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिये स्वच्छ जल संरक्षण के प्रोत्साहन में विभिन्न एनजीओ और गैर-सरकारी संगठन भी शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम को मनाने के दौरान, जल से संबंधित सभी मुद्दों को जनता के सामने उजागर किया जाता है जैसे किस तरह से साफ पानी लोगों की पहुँच से दूर हो रहा है आदि।
विश्व जल दिवस कैसे मनाया जाता है
पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जल के महत्व की ओर लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये पूरे विश्व भर में विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और क्रियाकलापों के आयोजनों के द्वारा मनाया जाता है जैसे दृश्य कला, जल के मंचीय और संगीतात्मक उत्सव, स्थानीय तालाब, झील, नदी और जलाशय की सैर, जल प्रबंधन और सुरक्षा के ऊपर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचर्चा, टीवी और रेडियो चैनल या इंटरनेट के माध्यम से संदेश फैलाना, स्वच्छ जल और संरक्षण उपाय के महत्व पर आधारित शिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता तथा ढ़ेर सारी गतिविधियाँ। नीले रंग की जल की बूँद की आकृति विश्व जल दिवस उत्सव का मुख्य चिन्ह है।
Monday, March 7, 2022
International Women's Day (08 March 2022)
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
हमारे जीवन में वैसे तो हर व्यक्ति का अपना-अपना खास स्थान है, लेकिन महिलाएं हमारे जीवन में कई अहम रोल निभाती हैं। कभी मां के रूप में, कभी बहन के रूप में, तो कभी एक पत्नी के रूप में। महिलाओं के सम्मान में ही हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में महिलाओं के जीवन में सुधार लाने, उनकी जागरुकता बढ़ाने जैसे कई विषयों पर जोर दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल 8 मार्च को ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? आखिर इसके पीछे ऐसी क्या वजह है, तो चलिए इस बारे में जानते हैं।
ऐसे हुई शुरुआत
साल 1908 में एक मजदूर आंदोलन के बाद ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी, क्योंकि काफी संख्या में महिलाओं ने न्यूयॉर्क में इस बात को लेकर मार्च निकाला था कि उनकी नौकरी के घंटे कम किए जाए और साथ ही उनका वेतनमान भी बढ़ाया जाए। महिलाओं के इस आंदोलन को सफलता मिली, और एक साल बाद ही सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इस दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया, जिसके बाद इसकी शुरुआत हो गई।
8 मार्च ही क्यों?
सबसे मन में ये सवाल जरूर उछल-कूद करता है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए 8 मार्च ही क्यों? तो यहां आपको बता दें कि साल 1917 में पहले विश्व युद्ध के दौरान 28 फरवरी को रूस की महिलाओं ने ब्रेड और पीस के लिए हड़ताल की थी। यही नहीं, हड़ताल के दौरान उन्होंने अपने पतियों की मांग का समर्थन करने से भी मना कर दिया था, और उन्हें युद्ध को छोड़ने के लिए राजी भी कराया था।
इसके बाद वहां के सम्राट निकोलस को अपना पद छोड़ना पड़ा था, और साथ ही महिलाओं को मतदान का अधिकार भी प्राप्त हुआ था। जैसे कि ये विरोध 28 फरवरी को किया गया था और यूरोप में महिलाओं ने 8 मार्च को पीस ऐक्टिविस्ट्स को सपोर्ट करने के लिए रैलियां निकाली थी। इसी वजह से इसी दिन यानी 8 मार्च को ही हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी।
क्या है महत्व?
हमारा समाज जितना भी जागरूक हो जाए, लेकिन आज भी महिलाएं अपने सम्मान के हक की लड़ाईयां लड़ते हुए नजर आती हैं। ऐसे में महिलाओ को लेकर समाज के लोगों को जागरूक करने, महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने जैसी चीजों के प्रति उन्हें जागरूक करने के लिए हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। जब हमारे समाज में महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा, वो सम्मान से इस समाज में रह पाएंगी, तभी तो हमारा समाज एक सभ्य समाज कहलाएगा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं की यह सफलता निश्चित ही संतोष प्रदान करती है। ऐसे में यह भी आवश्यक है कि सुदृढ़ समाज और राष्ट्र के हित में महिला, पुरुष के मध्य प्रतिद्वंद्विता स्थापित नहीं की जाए वरन सहयोगात्मक संबंध बढ़ाए जाएं। शिक्षित एवं संपन्न महिलाओं को चाहिए कि वे पिछड़ी महिलाओं के लिए जो भी कर सकती हैं करें। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की दशा सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है क्योंकि महिलाओं की समस्याएं महिलाएं ही भलीभांति समझती हैं इसलिए शिक्षित एवं संपन्न महिलाएं इस दिशा में विशेष योगदान दे सकती हैं। निश्चित ही इस संदर्भ में पुरुषों को भी अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना होगा।
Thursday, March 3, 2022
World Wildlife Day 2022 (03 March 2022)
विश्व वन्यजीव दिवस 2022
हर साल पूरी दुनिया में 3 मार्च को ‘विश्व वन्यजीव दिवस’ मनाया जाता है. ऐसे में कल इस दिन को मनाया जाएगा. इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनियाभर में तेजी से विलुप्त हो रही वनस्पतियों और जीव जन्तुओं की प्रजातियों की सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता (Awareness) पैदा करना है. जैव विविधता की समृद्धि ही धरती को रहने व जीवनयापन के योग्य बनाती है लेकिन समस्या यह है कि लगातार बढ़ता प्रदूषण, वातावरण पर इतना खतरनाक प्रभाव डाल रहा है कि जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की अनेक प्रजातियां धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं. भारत में इस समय 900 से भी ज्यादा दुर्लभ प्रजातियां खतरे में बताई जा रही हैं. यही नहीं, विश्व धरोहर को गंवाने वाले देशों की लिस्ट में दुनियाभर में भारत का चीन के बाद 7वां स्थान है.
विश्व वन्यजीव दिवस का इतिहास
जानवरों और पेड़-पौधों की खराब दुर्दशा को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2013 के 20 दिसंबर को 68वें सत्र में 03 मार्च के दिन को ‘विश्व वन्यजीव दिवस’ के रूप में अपनाए जाने की घोषणा की थी. 3 मार्च को विलुप्तप्राय वन्यजीव और वनस्पति के व्यापार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को स्वीकृत किया गया था. वन्य जीवों को विलुप्त होने से रोकने के लिए पहली बार साल 1872 में जंगली हाथी संरक्षण अधिनियम (वाइल्ड एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट) पारित हुआ था. तब से लेकर आज तक हर साल 3 मार्च को पूरी दुनिया में वन्य जीव को संरक्षित करने और इसके प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस दिन को सेलिब्रेट किया जाता है.
विश्व वन्यजीव दिवस की थीम
विश्व वन्यजीव दिवस के प्रति लोगों को जागरूक करने लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा हर साल एक थीम जारी की जाती है, जिससे कि विलुप्त हो रहे वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं की प्रजातियों की सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता पैदा की जा सके. विश्व वन्यजीव दिवस 2022 की थीम है- पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए प्रमुख प्रजातियों को पुनर्प्राप्त करना (Recovering Key Species For Ecosystem Restoration).
क्यों मनाया जाता है विश्व वन्यजीव दिवस
विश्व वन्यजीव दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्वभर में वन्यजीवों की सुरक्षा और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रति लोगों को जागरूक करना है. इस बात को समझना होगा कि पृथ्वी पर जैव विविधता को बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है कि हम धरती के पर्यावरण संबंधित स्थिति के तालमेल को बनाए रखें और इसके लिए वातावरण में पेड़-पौधों के साथ साथ वन्यजीव का होना भी जरूरी है.
"चलो एक पहल चलाये, सारे जीवो को बचाए.।"
"जीव- जंतुओ को बचाओ, सच्ची मानवता का धर्म निभाओ.।"
"वन्य जीवों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है..।"
Monday, February 28, 2022
National Science Day 2022 ( 28 Feb. 2022)
National Science day 2022
We observe National Science Day in India on 28th February every year to commemorate the important contribution of science, scientists and scientific progressions in our life.
Themes of National Science day 2022
'Integrated Approach in Science and Technology for Sustainable Future'
If we describe’ Science’ shortly, then it would be, the systematic knowledge based on experimental observations for an investigation, which is derived from the Latin word. The world-famous scientist once said – Science is blind without religion and religion is handicapped without science. Yes, it is absolutely correct and we must say the whole world is tied with the strong rope of science.
As we know nowadays science and applied science developing gradually & it is helping us to lead our life much better and easier. So, we can’t avoid science at all. It is a very important day to recall all the memory which science has given to us. Definitely, I will say that we must know about this Indian National Science Day.
History of National Science Day
The most eminent and outstanding Indian scientist Sir Chandrasekhar Venkat Raman (famously known as CV Raman) established his experimental thesis known as ‘ Raman Effect’, which he declared officially on 28th February in 1928.
He did a great discovery and globally became known for this contribution. Due to his discovery of the Raman Effect, he was honoured and awarded,
- The world-famous ‘Nobel Prize’ in 1930 in physics and he was the first Asian to receive this award in physics.
- Respectfully awarded with the 1st ‘Bharat Ratna’ award in 1954.
- And was also greatly honoured with the greatest award of Russia’ Lenin Peace’ in the year 1956.
The National Council for Science & Technology Communication made a proposal to our central government to observe National Science Day every year on 28th February to commemorate CV Raman’s great historic discovery Raman Effect.
Thereafter our government agreed to their declaration in 1986 and announced to celebrate National Science Day according to NCSTC’s proposal date. Then in 1987 on February 28 the first National Science Day was observed countrywide.
Objectives and purpose of celebrating this day
The main objective of this National Science Day is to aware people of our country about science. Add to this, it inspires children or students to choose science as their career. We can’t ignore them as they are our future to lead our nation in a progressive way. Many science-related programmes are organised to attract and inspire the thirsty students.
Likewise, our future generations by their extraordinary efforts achieve glorious success in the field of science and then yes, it will be our nation’s pride. The celebration purpose is to support and inspire new innovations of innovative scientists or students. The important aim of this celebration also is to make known publicly about the importance of science and scientific achievement of the whole world.
Monday, February 7, 2022
Safer Internet Day (08 February 2022)
सुरक्षित इंटरनेट दिवस
आज इंटरनेट हर किसी की अहम जरूरत बन गया है. किसी भी जानकारी को हासिल करना हो , रुपयो का ट्रांसफर करना हो सब जगह इंटरनेट का इस्तेमाल होता है. वहीं इंटरनेट के बढ़ते चलन के साथ ही इसके दुरुपयोग के मामलों में भी बेतहाशा इजाफा हुआ है साथ ही साइबर अपराध के मामले भी बढ़े हैं. सेफर इंटरनेट डे के दिन लोगों को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जाता है.
Theme of safer Internet Day 2022 : "Together for a better internet"
8 फरवरी, 2022 यानी आज दुनियाभर में सुरक्षित इंटरनेट दिवस मनाया जा रहा है. यह सभी के लिए ऑनलाइन सुरक्षित रहने के महत्व को पहचानने का अवसर है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य ऑनलाइन प्रौद्योगिकी और मोबाइल फोन के सुरक्षित और अधिक जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना है. गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर काफी चर्चा और बहस हो रही कैसे साल 2020 इंटरनेट सुरक्षा के मामले में आगे बढ़ा है. दरअसल प्रौद्योगिकी के इस युग में, वर्तमान पीढ़ी लगभग हर चीज के लिए इंटरनेट पर निर्भर है और इस वजह से साइबर क्राइम भी बढ़ा है.कब हुई सुरक्षित इंटरनेट दिवस मनाने की शुरुआत
पिछले साल, कोरोना संकट के दौरान वर्क फ्राम होम के कारण साइबर हमलों में भी इजाफा हुआ और साल 2022 में इसमें और इजाफा होने की आशंका है. इसे ध्यान में रखते हुए, 8 फरवरी को सुरक्षित इंटरनेट दिवस मनाया जा रहा है. बता दें कि इस दिवस की शुरुआत पहली बार 2004 में यूरोप में हुई थी. बाद में 2009 तक, यह यूरोप के बाहर दुनिया भर में मनाया जाने लगा. वर्तमान में, 150 से अधिक देश वैश्विक स्तर पर सुरक्षित इंटरनेट दिवस मनाते हैं.
इस दिवस पर जागरूकता फैलाने के साथ ही लोगों को साइबर हमलों का सामना करने के लिए शिक्षित किया जा सकता है. कई संगठन सेफर इंटरनेट दिवस पर ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर वेबिनार या पॉडकास्ट भी होस्ट करते हैं.
इंटरनेट के भारत में इस्तेमाल को लेकर OLX ने जारी की रिपोर्ट
बता दें कि भारतीयों के इंटरनेट उपयोग की आदतों पर OLX द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक , महामारी की वजह से भारतीयों के इंटरनेट उपयोग में 50% की वृद्धि हुई है और इसके कारण 61% भारतीय घरों में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भी इजाफा हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि निजता के अधिकार पर फोकस करते हुए 81% भारतीय इंटरनेट यूजर्स को कुछ ऐप का नहीं करने के लिए कहा गया. इसके अलावा, 45% यूजर्स ने कहा कि वे किसी भी समाचार या सूचना को ऑनलाइन शेयर करने से पहले उसे वेरिफाई करते हैं.
इंटरनेट सर्फिंग करने को लेकर की गई रिसर्च
वहीं स्टडी के मुताबिक, 58% रेस्पॉन्डेंट्स ने कहा कि उनके परिवार के सभी सदस्य अक्सर इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जबकि 15% ने कहा कि उनके घर में इंटरनेट के पाइमरी यूजर्स बुजुर्ग सदस्य थे. इस बीच, 82% ने कहा कि वे बढ़े हुए साइबर धोखाधड़ी के बारे में जानते हैं जो महामारी के दौरान उत्पन्न हुए थे. परिणामस्वरूप, कुछ ने सावधानी बरती. जबकि 57% यूजर्स ने कहा कि वे अब नकली या भ्रामक लिंक के साथ संदिग्ध मैसेज, ईमेल या कम्यूनिकेशन के किसी भी रूप को ओपन नहीं करते हैं, 45% ने कहा कि वे अब ऑनलाइन शेयर की गई किसी भी समाचार या जानकारी को वेरिफाई जरूर करते हैं.
08 फरवरी को सेफर इंटरनेट डे यानी इंटरनेट सरक्षा दिवस बनाया जाता है। तो चलिए हम आपको ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रहने के कुछ उपाय बताते हैं।
मजबूत पासवर्ड और टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन
एक मजबूत पासवर्ड रखना जरूरी है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर आपके पासवर्ड एक जैसे नहीं होने चाहिए। ट्विटर, फेसबुक और गूगल जैसे कंपनियां अकाउंट कीह अतिरिक्त रूप से सुरक्षित रखने के लिए टू फैक्टर आथेंटिकेशन (दो कारक प्रमाणीकरण) की सुविधा देती हैं। तो आपके लिए बेहतर है कि आप टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें।
स्पैम, घोटालों और फिशिंग (फंसने) से सावधान रहें
आप इस बात का ध्यान रखें कि आप कहां हैं। जो भी लिंक आपके पास हो उसकी जांच करें, वेबसाइटों पर पॉप-अप्स से सावधान रहें। यदि आप कुछ ऑनलाइन यह देखते हैं कि आापने कुछ जीता है, और ऐसा लगता है कि यह सत्य है, लेकिन काश ऐसा होता। फिशिंग स्कैमर बड़ी संख्या में लोगों को जालसाजी वाले मैसेज भेजते हैं ताकि उनकी निजी जानकरी जैसे पासवर्ड आदि हासिल कर सकें।
कोई ईमेल या वेबसाइट दिखने के लिए वैध हो सकती है। आप ई-मेल के स्रोत के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए ईमेल के हैडर्स की जांच कर सकते हैं, और आपको नए या अप्रत्याशित ईमेलों के बारे में संदेह होना ही चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि आपके पास ट्विटर के नाम से ई-मेल आता है और उसमें कोई अटैचमेंट है जो आप सावधान हो जाएं, क्योंकि ट्विटर अटैचमेंट्स के साथ ईमेल नहीं भेजता है।
कूकीज पर नजर
आप अपने डाटा को सुरक्षित रखना चाहते है, तो आपको ब्राउजिंग कूकीज पर नजर बनाए रखनी होगी। क्योंकि ये कूकीज ही अन्य साइट्स को आपकी जानकारी देती हैं। प्राइवेसी टूल आपकी कूकीज पर पूरी तरह से नजर बनाए रखता है। इसके अलावा आप ब्राउजर के सिक्योरिटी फीचर्स का भी उपयोग कर सकते हैं। इससे आपका डाटा कभी लीक या चोरी नहीं होगा।
साइट सिक्योर है या नहीं
जब भी आप किसी वेबसाइट पर जाते है, तो आपको उसके यूआरएल पर जरूर ध्यान देना होगा। आपको बता दें कि सुरक्षित साइट्स के यूआरल की शुरुआत https से होती है। अगर आपको यूआरल में सिर्फ http दिखता है, तो आपको इन वेबसाइट से बचना चाहिए। वहां एस (S) का मतलब है कि वेबसाइट पूरी तरह से सिक्योर है।
विज्ञापन पर कड़ी नजर
भूलकर भी किसी ऐसे विज्ञापन पर क्लिक ना करें, जो मोबाइल या कंप्यूटर में वायरस की जानकारी देता है। हैकर्स अक्सर इस तरह के विज्ञापनों का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। अगर आप इन विज्ञापन पर क्लिक कर जानकारी एंटर करते है, तो इससे आपको चूना लग सकता है।
Saturday, February 5, 2022
Basant Panchami Celebrated in KV No 2 Jaipur on 05 February 2022
05 फरवरी 2022 को केंद्रीय विधालय क्रमांक 2 जयपुर मे बसंत पंचमी का त्यौहार बडे धुमधाम के साथ मनाया गया जिसमे केंद्रीय विधालय के उप प्राचार्य श्री बाबू सिह राठौड़, श्रीमती मधु रितु, प्रधानाध्यापिका तथा अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे । कार्यक्रम मे विधार्थी भी उपस्थित रहे जो विधार्थी विधालय नही आये वे घर से ओंन लाईन माध्यम से जुडे हुए थे ।
Friday, February 4, 2022
विश्व कैंसर दिवस
विश्व भर में 04 फरवरी को हर साल विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व कैंसर दिवस मनाने के लिए प्रतिवर्ष एक थीम निर्धारित की जाती है। इस बार की थीम क्लोज द केयर गैप (Close The Care Gap) है। इस थीम के साथ यह दिन पूरे विश्व में मनाया जाएगा।
Theme of World Cancer Day 2022 : "Close The Care Gap"
दुनिया की सभी जानलेवा बीमारियों में कैंसर सबसे ख़तरनाक है क्योंकि कई बार इसके लक्षणों का पता ही नहीं चलता। जब इस बिमारी के होने का खुलासा होता है, तब तक काफी देर हो चुकी है और कैंसर पूरे शरीर में फैल चुका होता है। इसी वजह से कई लोगों को उचित इलाज का समय ही नहीं मिल पाता और उनकी मौत हो जाती है। अगर वक्त पर कैंसर की बीमारी का पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। साल 2018 में कैंसर की बीमारी की वजह से दुनियाभर में 96 लाख से ज़्यादा मौतें हुई थीं।
विश्व कैंसर दिवस की स्थापना अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (यूआईसीसी) द्वारा की गई। यह एक अग्रणीय वैश्विक एनजीओ है। इसका लक्ष्य विश्व कैंसर घोषणा, 2008 के लक्ष्यों की प्राप्ति करना है। अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (यूआईसीसी) की स्थापना साल 1933 में हुई थी। इस दिवस पर विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा कैंसर से बचाव के विभिन्न अभियान चलाए।
इसके पूर्व पहचान या रोकथाम के लिए कैंसर से बचाव के उपाय और ख़तरों के बारे में आम लोगों को जागरुक करने के लिए विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। लोगों को लगता है कि यह बीमारी छूने से फैलती है इसलिए कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को समाज में घृणा और अछूत के रूप में देखा जाता है। आम लोगों में कैंसर से संबंधित विभिन्न प्रकार के सामाजिक मिथक हैं जैसे कि कैंसर पीड़ित के साथ रहने या स्पर्श से उन्हें भी ये घातक बीमारी हो सकती है। इस तरह के मिथक को ख़त्म करने के लिए भी ये दिन मनाया जाता है। इसके होने के कारण, लक्षण और उपचार आदि जैसे कैंसर की सभी वास्तविकता के बारे में सामान्य जागरुकता बनाने के लिए इसे मनाया जाता है।
लोगों को जागरुक करने के लिए इस दिन पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं कि कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को अलग से उपचारित न किया जाए, उन्हें समाज में एक आम इंसान की तरह जीने का अधिकार होना चाहिए और कोई भी रिश्ता उनके लिए बदलना नहीं चाहिए। अपने रिश्तेदारों के द्वारा उनकी हर इच्छाओं को पूरा करना चाहिए भले ही उनके जीने की उम्मीद कम क्यों न हों। ये बहुत ज़रूरी है कि उन्हें एक आम इंसान की तरह अच्छा महसूस कराना चाहिए और ऐसा प्रतीत नहीं कराना चाहिए जैसे उनको कुछ उपचार दिया जा रहा है क्योंकि वो मरने वाले हैं। उन्हें आत्म-सम्मान को महसूस करने की ज़रूरत है और अपने समाज और घर में एक सामान्य वातावरण की ज़रूरत है।
कैंसर पर नियंत्रण पाना ज़रूरी
आंकड़ों के अनुसार, ये ध्यान देने योग्य है कि ज्यादातर कैंसर के मामले और मौतें (47% और 55% क्रमश:) विश्व के कम विकसित क्षेत्रों में सामने आए हैं। अगर ये नियंत्रित नहीं किया गया, तो 2030 तक ये और खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसलिए ये बहुत ज़रूरी है कि इसे दुनिया के हर कोने में नियंत्रित किया जाए।
कैंसर की उपस्थिति के ख़तरे को घटाने के लिए अपनी अच्छी जीवनशैली, नियंत्रित आहार, नियमित वर्कआउट के बारे में इस कार्यक्रम के दौरान लोगों को अच्छे से बढ़ावा दिया जाता है। उन्हें अपने शराब की लत, अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक स्थिरता से मुक्त कराने के लिए बढ़ावा दिया जाता है।
कैंसर के कारण
कैंसर होने के कई कारण होते हैं। हालांकि इनमें सबसे आम कारणों में धूम्रपान, तम्बाकू, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, खराब डाइट, एक्स-रे से निकली रेज, सूरज से निकलने वाली यूवी रेज, इंफेक्शन, फैमिली के जीन आदि होते हैं।
Celebration of National Sports Day on 29 August 2026 in PM shri KV No 2 Jaipur
राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 जयपुर में दिनांक 29 अगस्त 2026 को 15वां राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया, जिसमें ...





